iswa_admin October 4, 2020 0

Shabri: Mahan Ram Bhakt Ji Katha

Yatendra Sharma

Shri Ram Katha Sansthan Perth, a proud Associate Member of ISWA, is very pleased to announce the publication in e-book form of its new novel authored by its Founder/ President Dr Yatendra Sharma, Shabri: Mahan Ram Bhakt Ji Katha.

It is Hindi edition, English Edition may be available soon. For those interested in Hindi literature on Aryan culture during Treta yug, this book may interest. It may be downloaded from Amazon at a marginal price, around  AU$2.20 only. Since Shri Ram Katha Sansthan is a not for profit organisation, the price is kept very low.

Whomsoever interested but may not have access to Amazon, please advise me on yatendra@optusnet.com.au and we will send you free PDF version. Eventually, subject to the approvals of the MC of respective organisations of Hindu Council of Australia, Hindi Samaj of WA and ISWA, a hard copy launch of the novel will be organised once COVID situation is eased. Please circulate this message to those interested in Hindi literature.

त्रेता युग श्री राम का भू अवतार समय।

शबरी: रामायण की एक महत्वपूर्ण पात्र, श्री राम की एक अनन्य भक्त। सीता हरण के पश्चात अरण्य वन में श्री राम और लक्ष्मण एक वृद्ध महिला के आश्रम जाते हैं, और पूछते हैं: “जनकसुता कइ सुधि भामिनी। जानहि कहु करिबर गामिनी॥” क्या शबरी अयोध्या की एक गुप्तचर थीं जिन्हें सीता हरण की पूर्ण जानकारी थी? भील समुदाय के सरदार शबर सेन की पुत्री एवं महर्षि मतंग की शिष्या आचार्य श्रमणा, और एक आर्य महर्षि कुर्तुक की पुत्री , महर्षि भारद्वाज की शिष्या, दसराज्ञ युद्ध की सैन्य-नेता, प्रयाग गुरुकुल की उपकुलपति, ‘पुष्पक विमान’ एवं ‘अग्नि-वाण’ जैसे महान यंत्रों की महर्षि भारद्वाज की सह-आविष्कारक कुर्तकी, के क्या सम्बन्ध थे? महात्मा शबरी एवं महर्षि कुर्तकी को मोक्ष प्रदान एवं उनकी गाथाएं पढ़ने एवं सुनने वालों को सुख, शांति, ऐश्वर्यता एवं वैभवता का वरदान।

जानने के लिए पढ़िए, ‘शबरी: महान राम भक्त की कथा’, पौराणिक कथाओं पर आधारित।

कथा लेखक डॉ यतेंद्र शर्मा – सन १९५३ में एक हिन्दू सनातन परिवार में जन्मे डॉ यतेंद्र शर्मा की रुचि बचपन से ही सनातन धर्म ग्रंथों का पठन पाठन एवं श्रवण में रही है। तकनीकी विश्वविद्यालय ग्राज़, ऑस्ट्रिया, से रसायन तकनीकी में पी.अच्.डी की उपाधि विशिष्टता के साथ प्राप्त करने के पश्चात वह सन १९८९ से अपने परिवार सहित पर्थ ऑस्ट्रेलिआ में निवास कर रहें हैं, तथा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिआ के खनन उद्योग में कार्य रत हैं।

वह पर्थ स्थित एक धार्मिक संस्था ‘श्री राम कथा संस्थान पर्थ’ के संस्थापक/ अध्यक्ष हैं। उन्होंने पौराणिक कथाओं पर आधारित कई लघु कथाएं एवं काव्यों की रचना की है। यह संस्था धार्मिक कथाओं का प्रवचन, सनातन धर्म के महान संतों, ऋषियों, माताओं का चरित्र वर्णन एवं उनकी जीवन कथाओं के संकलन में अपना योगदान करने का प्रयास करती रहती है। यह लघु उपन्यास ‘ शबरी: महान राम भक्त की कथा’ उसी प्रयास के फल स्वरूप एक प्रस्तुति है।

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